हमें जल का महत्व समझना होगा ये मानव जाति का कर्तव्य है - राजा गुर्जर 

गाजियाबाद। जल की उपलब्धता को लेकर वर्तमान में भारत ही नहीं अपितु समूचा विश्व चिन्तित है पर्यावरण जन चेतना समिति के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजा गुर्जर जी ने कहा कि जल ही जीवन है। जल के बिना सृष्टि की कल्पना नहीं की जा सकती। मानव का अस्तित्व जल पर निर्भर करता है।विश्व जल दिवस हर वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। आज विश्व में जल का संकट सर्वत्र व्याप्त है। विश्व में चहुंमुखी विकास का दिग्दर्शन हो रहा है।किंतु स्वच्छ जल मिल पाना कठिन हो रहा है। विश्व भर में साफ जल की अनुपलब्धता के चलते ही जल जनित रोग महामारी का रूप ले रहे हैं। इंसान जल की महत्ता को लगातार भूलता गया और उसे बर्बाद करता रहा, गांव के नल सुख गए कुंवे सुख गए गांव के झोड़ इत्यादि सब बन्द हो गए जिसके फलस्वरूप आज जल संकट सबके सामने है। विश्व के हर नागरिक को पानी की महत्ता से अवगत कराने के लिए ही संयुक्त राष्ट्र ने विश्व जल दिवस मनाने की शुरुआत की थी जल संरक्षण दिवस जल के प्रति चेतना और जागरूकता पैदा करने का महत्वपूर्ण अवसर है, परंतु यह तभी सार्थक हो सकता है जब हम जल के संरक्षण का असली महत्व समझकर उसे अपने जीवन में शामिल करें। जल के बिना जीवन की कल्पना विडंबना है देश के कई हिस्सों में अभी से जबरदस्त जल संकट गहरा गया है। जनसंख्या के भारी विस्फोट के साथ कल−कारखाने, औद्योगिकीकरण और पशुपालन को बढ़ावा दिया गया, उस अनुपात में जल संरक्षण की ओर ध्यान नहीं गया, जिस कारण आज गिरता जल स्तर बेहद चिंता का कारण बना हुआ है।जल जीवन का सबसे आवश्यक घटक है और जीविका के लिए महत्वपूर्ण है यह समुद्र,नदी, तालाब, पोखर, कुआं, नहर इत्यादि में पाया जाता है हमारे दैनिक जीवन में जल का बहुत महत्व है। हमारा जीवन तो इसी पर निर्भर है। यह पाचन कार्य करने के लिए शरीर में मदद करता है और हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। यह हमारी धरती के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह हमारे जीवन की गुणवत्ता निर्धारित करने में महत्वपूर्ण घटक है और सार्वभौमिक है जल वनस्पति एवं प्राणियों के जीवन का आधार है उसी से हम मनुष्यों,पशुओं एवं वृक्षों को जीवन मिलता है। भारत नदियों का देश कहा जाता है। पहले जमाने में गंगाजल वर्षों तक बोतलों, डिब्बों में बन्द रहने पर भी खराब नहीं हुआ करता था, परन्तु आज जल−प्रदूषण के कारण अनेक स्थानों पर गंगा−यमुना जैसी नदियों का जल भी छूने को जी नहीं करता हमें इस जल को स्वच्छ करना है एवं भविष्य में इसे प्रदूषित होने से बचाना है। हमे जल का महत्व समझना होगा जल बचाये कल बचाये।